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व्हाट्सएप कॉल के जरिए कार्यालय बुलाकर भूमाफिया अखिलेश दुबे ने वसूली थी रंगदारी

अखिलेश दुबे ने जमानत की अर्जी पर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान तर्क दिया किया गया कि आरोपी ने लोगों को रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर पैसे ऐंठे।

Crime Desk;  हाईकोर्ट ने रंगदारी मामले में कानपुर के अधिवक्ता अखिलेश दुबे की जमानत याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी एक प्रभावशाली व्यक्ति है, इसलिए संभावना है कि अगर उसे रिहा किया गया, तो वह गवाहों को डरा सकता है।
सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है। हालांकि गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद आवेदक को जमानत की नई अर्जी देने की आजादी है। आरोपी ने किदवई नगर में होटल कारोबारी सुरेश पाल को फर्जी गैंगरेप केस में फंसाकर 2.50 करोड़ रुपए की रंगदारी वसूली थी।

 

कारोबारी सुरेश पाल का आरोप है कि वर्ष 2021 में एडवोकेट अखिलेश दुबे ने उन्हे वॉट्सएप कॉल कर साकेत नगर स्थित अपने कार्यालय बुलाया था। वहां अखिलेश ने कहा कि कुछ लोग उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की साजिश कर रहे हैं।
इससे बचना है तो पैसे देने होंगे, अन्यथा उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। इस धमकी से डरकर वह कुछ समय के लिए शहर छोड़कर चले गए, बाद में अखिलेश ने फिर संपर्क कर आश्वासन दिया कि शहर लौटने पर गिरफ्तारी नहीं होगी।

कारोबारी के अनुसार, जब वह शहर लौटे, तो उनसे 5 करोड़ रुपए की मांग की गई। जब उन्होंने असमर्थता जताई, तो बात 2.50 करोड़ रुपए में बात तय हुई। कारोबारी ने बताया कि उन्होंने कई बार में अखिलेश दुबे और लवी मिश्रा को यह रकम दी। मामले में किदवई नगर पुलिस ने अखिलेश दुबे और लवी मिश्रा के खिलाफ 230 पन्नों को चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी।

अखिलेश दुबे ने जमानत की अर्जी पर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान तर्क दिया किया गया कि आरोपी ने लोगों को रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर पैसे ऐंठे।

आरोपी और कारोबारी के बेटे के बीच हुई बातचीत के कई ऑडियो भी सामने आए है। दलीलों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

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