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शिवलिंग जिसका नहीं है कोई छोर आगरा के शिवालय का पढ़ें इतिहास और महत्व

शिवलिंग जिसका नहीं है कोई छोर आगरा के शिवालय का पढ़ें इतिहास और महत्व

शिवलिंग जिसका नहीं है कोई छोर आगरा के शिवालय का पढ़ें इतिहास और महत्व

आगरा शहर को शिवालय की नगरी की संज्ञा यदि दी जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।
मुगलिया इमारतों से घिरे इस शहर में सनातन धर्म के मंदिरों की जैसे श्रंखला सरीखे है।
शहर के मध्य में बने मनः कामेश्वर मंदिर, रावली मंदिर के साथ ही वनखंडी महादेव की
भी कम मान्यता नहीं है। सावन के सोमवार के साथ ही प्रत्येक सोमवार को महादेव के
भक्त यहां उमड़ते ही हैं।

वनखंडी महादेव मंदिर, बाबरपुर सिकंदरा आगरा के शिव मंदिरों में एेसे अनेक मंदिर हैं,
जिनके नाम एक जैसे हैं। गैलाना रोड, सिकंदरा स्थित वनखंडी महादेव मंदिर के बारे में तो
शहरवासी जानते हैं, लेकिन दूसरा वनखंडी महादेव मंदिर सिकंदरा के बाबरपुर (केके नगर के पास) है।
मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार वर्ष 2005 में कराया गया था। उस समय ककैया ईंटों और चूने की चिनाई निकली थी।
उस समय शिवलिंग को हटाकर दूसरा शिवलिंग लगाने के लिए खोदाई की गई तो उसका छोर नहीं मिला। इसलिए इसे ज्यों का त्यों रहने दिया गया।

यह उदासीन संप्रदाय का मंदिर है। मंदिर परिसर में संप्रदाय के श्रीचंद्र भगवान, गुरु जयकिशन की मूर्तियां भी हैं।

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