#रामराज्य में सिसकती प्रजा…सरकारी अफसरों पर ही दबंग का साथ देने का लगा आरोप…देखे पूरा मामला
ये रोते बिलखते चेहरे, आंखों में आंसू लिए बुजुर्ग दंपति...इनका दर्द सुनकर आप भी परेशान हो जाएंगे...इस बुजुर्ग दंपति के आंसू काफी हैं...सरकारी तंत्र को आइना दिखाने के लिए...वो सरकारी तंत्र जो जनता की सेवा का दायित्व उठाता है...वो सरकारी तंत्र जिसे बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों में बेहतरीन रूम, एसी की ठंडी हवा, और आराम दायक कुर्सी मिलती है, लेकिन ये लोकसेवक जो अपनी कर्मठता, कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी का शॉल ओढ़े रहते हैं...आज उसी शॉल के धागे उधेड़ेंगे हम..

ये रोते बिलखते चेहरे, आंखों में आंसू लिए बुजुर्ग दंपति…इनका दर्द सुनकर आप भी परेशान हो जाएंगे…इस बुजुर्ग दंपति के आंसू काफी हैं…सरकारी तंत्र को आइना दिखाने के लिए…वो सरकारी तंत्र जो जनता की सेवा का दायित्व उठाता है…वो सरकारी तंत्र जिसे बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों में बेहतरीन रूम, एसी की ठंडी हवा, और आराम दायक कुर्सी मिलती है, लेकिन ये लोकसेवक जो अपनी कर्मठता, कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी का शॉल ओढ़े रहते हैं…आज उसी शॉल के धागे उधेड़ेंगे हम…आपको दिखाएंगे वो सच जिसे देखकर आप भी दंग रह जाएंगे…आपको दिखाएंगे वो हकीकत जो आज समाज के हर तीसरे गरीब, मुफलिसी में दिन गुजार रहे इंसान की है…आपको दिखाएंगे वो तंत्र जिसकी कार्यशैली अक्सर सवालों के घेरे में बनी रहती है…आपको दिखाएंगे वो फलसफा जिसके आगे बेबसी भी बेबस हो जाती है…तो क्या है इस बुजुर्ग दलित दंपति की तकलीफ और सिस्टम में बैठे कौन लोग हैं इसके जिम्मेदार जिनकी आवाज अब बना है किसान युनियन..
रामराज्य की सिसकियां लेती प्रजा…जी हां से लाइन कहना गलत ना होगा…क्योंकि मामला ही कुछ ऐसा है…तमाम कसरतों और हिदायत के बाद भी सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के गृहजनपद गोरखपुर से आ रही एक बुजुर्ग दंपति के रोने, चीखनें की आवाजें यही बता रही हैं कि जमीनी विवाद से संबंधित गंभीर मसलों को लेकर अब भी अफसरों का रवैया वैसा ही उदासीन बना हुआ है…जैसा पहले हुआ करता था…दरअसल मामला कैम्पियरगंज तहसील का है…जहां मछली गांव निवासी इस दलित गरीब दंपति का कहना है कि इनकी जमीन पर लेखपाल और कानूनगो की मदद से एक दबंग कब्जा कर रहा है…इस अनपढ़ बुजुर्ग दंपति को यह भी नहीं पता कि अपनी पीड़ा मकिस अधिकारी से जाकर कहे…बड़े साहब से मुलाकात की आस में यह बुजुर्ग दंपति जानकारी ना होने के चलते तीन दिनों तक सर्द रातें गोरखपुर प्लेटफॉर्म पर काटता रहा…और गोरखपुर दीवानी कचहरी की सड़कों पर न्याय की आस में फांका करता रहा…बुजुर्ग दंपति के मुताबिक उसके जीवन की रील में तीन खलनायकों ने ऐसी एंट्री मारी कि इनका सबकुछ लुटने की कगार पर है…बुजुर्ग दंपति के जीवन में एक दबंग महेंद्र ने दस्तक दे दी है जो जबरन इनकी जमीन पर कब्जा कर रहा है…तो दूसरी तरफ इस खलनायक की मदद सह खलनायक बनकर कैम्पियरगंज तहसील के कानूनगो विजय त्रिपाठी और हल्का लेखपाल बबू साही कर रहे हैं…जो इस गरीब दलित की जमीन पर कब्जा कराने में दबंग महेंद्र की मदद कर रहे हैं…इस बुजुर्ग दंपति की बस यही इच्छा है कि दबंग महेंद्र द्वारा कराए जा रहे निर्माण को रोककर पहले इनकी जमीन का सीमांकन करा लिया जाए ताकि यह भी सुकून से रह सके…
जिसके बाद एसडीम के पास मामला आया तो उन्होंने मामले का संज्ञान लेते हुए दोबारा मछली गांव में पैमाइश के लिए टीम भेजी…बता दें कि यह पीड़ित परशुराम भारती ने जमीन विवाद को लेकर के काफी जगह एप्लीकेशन दी…पीड़ित परशुराम भारती का आरोप है कि यह लोग मेरे गांव के रहने वाले दबंग महेंद्र कचेर से मिलकर मेरी जमीन को कब्जा करवा रहे हैं और जब यह मामला कैंपियरगंज भारतीय किसान यूनियन के पास पहुंचा तो किसान यूनियन ने यह सब देखते हुए तहसील में धरना प्रदर्शन किया…उसी दौरान जब यह मामला कैंपियरगंज एसडीएम पंकज दीक्षित के संज्ञान में पहुंचा तो राजस्व विभाग की टीम हल्का लेखपाल बाबूशाही और कानूनगो विजय त्रिपाठी और कई लेखपाल और नायब तहसीलदार और तहसीलदार चकबंदी अधिकारी मौके पर पहुंचकर के गाटा संख्या 321 की पैमाइश की…पैमाइश के दौरान जो परशुराम ने लेखपाल और कानूनगो के ऊपर गंभीर आरोप लगाये थे उन्हीं के साथ मिलकर पीड़त परशुराम और उनकी पत्नी दोनों ने जमीन पैमाइश का काम शुरू कर किया…जिसके बाद पूरी जमीन की पैमाइश की गई और कुछ जमीन परशुराम के गाटा संख्या 321 में अधिक सामने आई…अब मामला यह खड़ा होता है की जो परशुराम भारती का दो लकबा होने के कारण केवल जो गाटा संख्या 321 उसी को नप्पी किया गया और हमारे 162 गाटा संख्या का कोई जानकारी नहीं दिया गया…जब वहीं मीडिया ने हल्का लेखपाल और कानूनगो से बात की तो कानूनगो ने बताया कि जिस बात की एप्लीकेशन मुझे मिली थी उसी काम पर पैमाइश की गई है अन्यथा मैं 162 की पैमाइश कैसे कर सकता हूं…




