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प्रयागराज : 18 साल की नौकरी में सिपाही बना करोड़पति

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि के गनर रहे कांस्टेबल अजय कुमार सिंह को आय से अधिक संपत्ति मामले में प्रारंभिक जांच में दोषी पाया गया है। सोमवार को कर्नलगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

जब मामला शासन तक पहुंचा तब गृह विभाग की ओर से दिसंबर 2022 में जांच के आदेश दिए गए। भ्रष्टाचार निवारण संगठन मुख्यालय की ओर से जनवरी 2023 में जांच इंस्पेक्टर ठाकुरदास को सौंपी गई। इंस्पेक्टर की जांच में आरोपी दीवान अजय कुमार सिंह प्रारंभिक रूप से दोषी पाया गया। 17 जुलाई 2023 को कर्नजगंज कोतवाली में इंस्पेक्टर ने एफआईआर दर्ज कराई।

वर्ष 2005 में अजय कुमार सिंह पुलिस विभाग में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुआ और 18 साल की नौकरी में करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन गया। दीवान अजय कुमार सिंह मूल रूप से बलिया का रहने वाला है। महंत नरेंद्र गिरि की 20 सितंबर 2021 को डेथ होने के बाद उसे प्रयागराज से ट्रांसफर कर कौशांबी में तैनात कर दिया गया था। 10 जुलाई 2012 को उसकी तैनाती प्रयागराज में हुई। उसे महंत नरेंद्र गिरि की सुरक्षा में तैनात कर दिया गया। देखते ही देखते वह महंत नरेंद्र गिरि का खास बन गया। अजय गले में सोने की मोटी चैन, कलाई में महंगी घड़ियां, ब्रांडेड और महंगे कपड़े और जूते पहनता है। इसकी चर्चाएं पुलिस विभाग में होती रहती थी। आरोप है कि महंत नरेंद्र गिरि की राजनीतिक पहुंच के बल पर वह बड़े-बड़े अधिकारियों की ट्रांसफर और पोस्टिंग का ठेका लेने लगा था। महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद उसकी तस्वीरे सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं।

सिपाही अजय कुमार सिंह की पत्नी के नाम पर प्रयागराज के अल्लापुर में 5 अक्टूबर 2019 को 39.22 लाख रुपए और 10 अप्रैल 2014 को 22 लाख मूल्य के 2 फ्लैट खरीदे गए हैं। इसके अलावा सिपाही पर अपने गांव बलिया में करोडों का मकान, प्रयागराज के नारीबारी में करोड़ों की जमीन खरीदने का अरोप है। अजय पर अपने अल्लापुर स्थित फ्लैट में 25 लाख रुपए का इंटीरीयर कराने के भी आरोप हैं। वहीं, इस मामले में दीवान अजय कुमार सिंह का कहना है कि उन्हें इस संबंध में कुछ भी नहीं कहना है। वह अभी कौशांबी जनपद से अटैच हैं। जांच का वह सामना करेंगे।

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