75 साल पहले Guru Dutt ने बनाई थी भारत की पहली Crime Noir, हॉलीवुड को टक्कर
Guru Dutt ने सिर्फ दर्द और संवेदना वाली फिल्में ही नहीं बनाई बल्कि उनकी शुरुआती फिल्में अपराध कथाओं पर आधारित थीं।

Bollywood; गुरुदत्त का नाम आते ही प्रेम और विरह, दर्द और संवेदना, दया और करुणा, मासूमियत और बेबसी जैसे शब्दों को परदे पर उतारनेवाले दृश्य याद आने लगते हैं। याद आती हैं उनकी फिल्में ‘साहिब बीबी और गुलाम’, ‘प्यासा’ और ‘कागज के फूल’। ऐसा लगता है कि कम ही लोग इस बारे में जानते होंगे कि गुरुदत्त ने सिर्फ दर्द और संवेदना वाली फिल्में ही नहीं बनाई बल्कि उनकी शुरुआती फिल्में क्राइम स्टोरीज पर आधारित थीं।
गुरु दत्त की पहली फिल्म
जब गुरुदत्त (Guru Dutt) फिल्मों में काम करने आए थे तो उन्होंने क्राइम स्टोरीज पर फिल्म बनाने वाले ज्ञान मुखर्जी के साथ काम किया था। फिल्म निर्देशन की बारीकियां उनसे ही सीखीं। देवानंद (Devanand) की फिल्म कंपनी नवकेतन के लिए गुरुदत्त को पहली बार फिल्म निर्देशित करने का अवसर मिला। फिल्म थी ‘बाजी’ (Baazi), जो 1 जुलाई 1951 को प्रदर्शित हुई थी।
गुरुदत्त 39 की उम्र में दुनिया से चले गए । कम उम्र में ही उन्होंने कई कल्ट फिल्में बनाईं जिनका विश्लेषण अब भी होता रहता है। इन कल्ट मानी जाने वाली फिल्मों के अलावा गुरुदत्त ने क्राइम पर आधारित चार फिल्में बनाई -‘बाजी’, ‘जाल’, ‘बाज’ और ‘सैलाब’।
न्वार मूवमेंट का हिस्सा मानी गई ‘बाजी’
यह वही दौर था जब देश में क्राइम स्टोरीज को लेकर एक खास किस्म की उत्सुकता का वातावरण था। अपराध कथाओं पर आधारित उपन्यास खूब बिक रहे थे। उधर हॉलीवुड में फिल्म न्वार मूवमेंट शुरू हो चुका था। इस तरह की फिल्मों का नायक कुटिल भी होता था, उसका कैरेक्टर संदेहास्पद होता था लेकिन जो दिखता था वो उससे अलग होता था। इन फिल्मों में ब्लैक एंड व्हाइट फ्रेम का यूज होता था।
फ्लैशबैक और वायस ओवर के साथ नैरेशन इस तरह की फिल्मों में एक अलग ही तरह का प्रभाव पैदा करता था। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के वैश्विक परिदृश्य में इस तरह की फिल्में बननी शुरु हुई थी। हिंदी फिल्मों की दुनिया पर भी इसका असर दिखा। गुरुदत्त की फिल्म ‘बाजी’ को भी न्वार मूवमेंट का हिस्सा माना गया।
हॉलीवुड को टक्कर देती है फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी बहुत अलग नहीं थी। फिल्म का नायक मदन (देव आनंद) एक संपन्न परिवार से आता है लेकिन परिस्थितियों के कारण जीवनयापन कठिन हो जाता है। वो छोटी बहन मंजू (रूपा वर्मन) के साथ रहता है। रोजगार की तलाश में भटकते-भटकते जुआ खेलने लगता है। एक दिन एक होटल में उसकी भेंट डांसर लीना (गीता बाली) से होती है।
‘बाजी’ के बारे में
1951 में प्रदर्शित फिल्म ‘बाजी’ के नायक देवानंद और नायिका गीता बाली और कल्पना कार्तिक थीं। फिल्म में अधिकतर गीत गीता दत्त ने गाए थे। इस फिल्म का संगीत एस डी बर्मन ने दिया था। संगीत में गजब किस्म का आकर्षण है। गीता दत्त की आवाज में गाया गीत ‘तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बना ले’ या ‘ये कौन आया कि मेरे दिल की दुनिया में बहार आई’ की धुन अब भी लोगों के याद में है।




