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देशभर में रावण दहन, जगह जगह होगी सत्य की जीत,देखिये क्या है शुभ मुहूर्त

Dussehra 2026 Ravan Dahan Timing : दिल्ली और हरियाण के कई दशहरा ग्राउंड और रामलीला मैदान में 20 अक्टूबर को ही रावण दहण का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

Dussehra 2026; दशहरे पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने किया शस्त्र पूजन

दशहरे पर शस्त्र पूजन की भी परंपरा है और इसी परंपरा को निभाया है RSS प्रमुख मोहन भागवत ने। इन्होंने नागपुर के रेशीमबाग ग्राउंड में शस्त्र पूजन किया।
दशहरे पर शस्त्र पूजन की भी परंपरा है और इसी परंपरा को निभाया है RSS प्रमुख मोहन भागवत ने। इन्होंने नागपुर के रेशीमबाग ग्राउंड में शस्त्र पूजन किया।

दिल्ली में अबकी बार रावण दहन में जलेगा कॉकरोच, वह भी 30 फुट का

अबकी बार दिल्ली में रावण दहण पर यूनिक नजारा देखने को मिलेगा- श्री केशव रामलीला कमेटी रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पारंपरिक पुतलों के साथ अबकी बार कॉकरोच का एक अनोखा 30 फीट ऊंचा पुतला भी जलाने के लिए तैयार किया है। इसको लेकर लोगों को काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

अबकी बार दिल्ली में रावण दहण पर यूनिक नजारा देखने को मिलेगा- श्री केशव रामलीला कमेटी रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पारंपरिक पुतलों के साथ अबकी बार कॉकरोच का एक अनोखा 30 फीट ऊंचा पुतला भी जलाने के लिए तैयार  किया है। इसको लेकर लोगों को काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

दशहरे पर विजया मुहूर्त कब से कब तक

दशहरे दिन दिन विजय मुहूर्त का बड़ा ही महत्व रहता है, इस मुहूर्त में कोई भी किया गया काम विजयी बनाता है यानी सफल होता है। पंचांग की गणना के अनुसार 20 अक्टूबर को दोपहर में 2 बजकर 59 से 3बजकर 43 तक विजय मुहूर्त रहेगा। इस समय जया और विजया देवी की पूजा करना शुभ होगा। इस समय शस्त्र पूजन करना भी शुभ रहेगा।

दिल्ली में जलेगा रावण और नोएडा के इस गांव में दुखी होंगे लोग

अब लौटकर आते हैं फिर नोएडा की ओर यहां बिसरख नामक स्थान को रावण की जन्मस्थली माना जाता है। कहते हैं कि रावण के पिता ऋषि विश्रवा यहीं भगवान शिव की उपासना करते थे। यहीं रावण का बचपन बीता और यहीं उसमें शिव भक्ति का अंकुर भी फूटा। और महान शिव भक्त हुआ। इसलिए यहां दशहरे के दिन रावण के मंदिर में रावण की पूजा होती है और यहां रामलीला में रावण दहन नहीं किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जब कभी यहां रावण दहन हुआ है कुछ न कुछ अनहोनी हुई है इसलिए यहां के लोग रावण दहन नहीं करते हैं। यहां 2016 में कुछ असामाजिक तत्वों ने मंदिर पर हमला किया और दशकों पुरानी रावण सहित अन्य प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाया। यहां के लोग रावण को अपना वंशज और गांव का बेटा मानकर उसकी पूजा करते हैं।
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