
उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार जहां एक और अधिकारियों पर रिश्वत को लेकर नकेल कसने को लेकर बड़े बड़े भाषण देते हैं| और रिश्वत लेनें वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगातार कार्रवाई करने की बात करती है|तो दूसरी और उसकी ही सरकार में जिले पर मौजूद अधिकारी अपनें कर्मचारी को बचनें का कार्य कर रहे हैं| ताजा मामला उत्तर प्रदेश के जनपद शाहजहाँपुर की तहसील पुवायां ब्लॉक खुटार का है |ब्लॉक खुटार में तैनात ग्राम विकास अधिकारी सचिव के पद पर तैनात है|उसने प्रधान की रंजिश को अपनीं रंजिश मानते हुए पीड़ित के गलत प्रमाण पत्र जारी कर दिए सचिव ने बेला ग्राम पंचायत निवासी पवन कुमार के दो भतीजों के जन्म प्रमाण पत्र ₹500 की रिश्वत के चक्कर में गलत बना दिए हैं|जहाँ दोनों मासूमों की उम्र मात्र तीन से चार साल की है|जहाँ रिश्वत खोर सचिव ने दोनों मासूम बच्चों की तीन साल चार साल के बजाय उन्हें 104 साल 6 साल का कर दिया इतना ही नहीं इन महाशय ने उक्त पीड़ित को जातिसूचक भद्दी भद्दी गालियां भी दी पीड़ित ने जब इसका विरोध किया तो प्रधान ने उसे जान से मार देने की धमकी दे डाली थक हार कर जब पीड़ित ने थाना खुटार में गुहार लगाई तो उसकी एक न सुनी गई फिर क्या था उसने एसपी डीएम के चक्कर लगा चुका है| लेकिन सत्ता पक्ष के दबाव के कारण उसकी एक न सुनी गई तब थक हार कर उसने भ्रष्टाचार अधिनियम के अंतर्गत बरेली कोर्ट में अपनी शिकायत दर्ज कराई जहां पर कोर्ट ने थाना खुटार को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए लेकिन इससे पहले रिश्वतखोर सचिव और दबंग प्रधान जोकि मौजूदा समय में युवा मोर्चा भारतीय जनता पार्टी का जिला महामंत्री है| ने कोर्ट से स्टे ले लिया सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है| कि जो जन्म प्रमाण पत्र बने हैं उनमें 1916 1918 दर्ज की गई है| जबकि बच्चों की उम्र 3 साल और 4 साल है| सचिव ने अपनी नौकरी को बचाने के लिए दोबारा जन्म प्रमाण पत्र जारी कर अपनें अधिकारियों और कुछ प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के रिपोर्टरों को देकर अपनी सफाई पेश की और मीडिया के सामने अपनी सफाई पेश करते हुए कह रहे हैं| कि हमारे द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र में पीड़ित द्वारा खुद छेड़ छाड़ की गई है| जबकि आप स्वयं साक्षात देख सकते हैं|कि किस तरीके से जन्म प्रमाण पत्र ओरिजिनल साथ हैं|जबकि पीड़ित द्वरा उन पर लेमिनेशन भी कराया गया है| और उसमें ऐसी कोई भी किसी तरीके की छेड़छाड़ नहीं की गई जिससे कि उनको कहा जाए जन्म प्रमाण पत्र में रंजिशन सचिव और प्रधान के द्वारा 1916 और 1918 लिखा किया गया है| अब देखना होगा कि अधिकारी पर कार्रवाई करते हैं या फिर अपने कर्मचारी को बचा ले जाएंगे



