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केंद्र से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, आप ब्रिटिश काल के राजद्रोह कानून को क्यों नहीं कर रहे रद

केंद्र से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, आप ब्रिटिश काल के राजद्रोह कानून को क्यों नहीं कर रहे रद

केंद्र से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, आप ब्रिटिश काल के राजद्रोह कानून को क्यों नहीं कर रहे रद

सुप्रीम कोर्ट ने ‘औपनिवेशिक काल’ के राजद्रोह संबंधी दंडात्मक
कानून के ‘भारी दुरुपयोग’ पर गुरुवार को गहरी चिंता व्यक्त की।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यह
देश में आजादी के आंदोलन को कुचलने के लिए अंग्रेजों की ओर से बनाया गया कानून था।
इसी बीच पूर्व केंद्रीय आईटी मंत्री अरुण शौरी ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी)
1860 की धारा 124-ए (देशद्रोह कानून) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

गैर-जमानती प्रावधान किसी भी भाषण या अभिव्यक्ति को बनाता है जो
भारत में कानून द्वारा स्थापित सरकार के प्रति घृणा या अवमानना ​​​​या उत्तेजित करने या असंतोष को उत्तेजित करने का प्रयास करता है।

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