खतरे के निशान के करीब पहुंची गंगा, 24 घंटे में 18 सेमी उछला जलस्तर
शुक्लागंज के तटीय इलाकों में दहशत घरों में घुसा बाढ़ का पानी, छतों पर शरण लेने को मजबूर हुए लोग आवागमन के लिए प्रशासन ने उतारीं नावें, बाढ़ चौकियों और गोताखोरों को अलर्ट मोड पर रखा गया

Kanpur; उन्नाव।शुक्लागंज के तटीय इलाकों में दहशत घरों में घुसा बाढ़ का पानी, छतों पर शरण लेने को मजबूर हुए लोग
आवागमन के लिए प्रशासन ने उतारीं नावें, बाढ़ चौकियों और गोताखोरों को अलर्ट मोड पर रखा गया
गंगा के रौद्र रूप ने एक बार फिर तटवर्ती बस्तियों के बाशिंदों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। बीते 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 18 सेंटीमीटर की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद गंगा अब खतरे के निशान से महज 19 सेंटीमीटर दूर बह रही हैं। जलस्तर में आए इस उफान से किनारे बसे निचले इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल है। पश्चिमी गंगाघाट क्षेत्र के तकरीबन दो सैकड़ा मकान चारों तरफ से पानी में घिर चुके हैं, जिससे लोगों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है। मजबूरी में लोग घरों की छतों और ऊपरी मंजिलों पर डेरा जमाए हुए हैं, वहीं चूल्हा-चौका भी छतों पर ही चल रहा है।
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार शाम छह बजे गंगा का जलस्तर 112.630 मीटर दर्ज था, जो गुरुवार शाम छह बजे 18 सेमी चढ़कर 112.810 (लगभग 112.830) मीटर पर पहुंच गया। शुक्लागंज में खतरे का पैमाना 113.000 मीटर निर्धारित है, ऐसे में नदी लाल निशान छूने को बेताब दिख रही है।
बढ़ते जलस्तर की मार

मोहम्मदनगर, गोताखोर, हुसैननगर, शाहीनगर और करबला जैसे मोहल्लों पर सबसे ज्यादा पड़ी है, जहां गलियों से लेकर घरों तक सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है।
संजय भारती


